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Aarogya Setu ka khatraAarogya Setu App Ka Sach : Facts You Don’t Know

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं गवर्नमेंट द्वारा सबसे ज्यादा प्रमोट किए जाने वाले App Aarogya Setu की। दोस्तों Aarogya Setu एक ऐसा App बन चुका है जो 100 मिलीयन डाउनलोड्स को भी, मतलब एक करोड़ डाउनलोड को भी पार कर चुका है यहां हम आपको यह बात बताना चाहते हैं कि एक नॉर्मल App को 100 मिलियन लोग डाउनलोड कर चुके होते तो अब तक आप इतने अमीर हो चुके होते कि आपके 7 पुश्तें बिना कुछ किए आराम से बैठ कर खाते।

Aarogya Setu एप एक ऐसा App बन चुका है जो अपने शुरुआती 1 हफ्ते में ही 5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड कर लिया था। और इस समय इस App को 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड कर लिया है।

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दोस्तों यहां मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं कि जैसे ही लोगों ने इस App को डाउनलोड करना शुरू किया उसी समय इंडियन आर्मी ने अपने जवानों को एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया कि अगर आपको इस App को डाउनलोड या इस्तेमाल करना ही है तो करिए लेकिन Proper Cyber Precautions के साथ करना होगा।Army aarogya setu

तो अब सवाल यह है कि आखिर आर्मी ने अपने जवानों को इस App को Precautions के साथ ही use करने के लिए क्यों बोला? क्या इसमें किसी तरह का कोई Privacy Concern है? अगर है तो गवर्नमेंट इसे हमसे छुपा क्यों रही है?

जब इसके बारे में थोड़ी research की गई तो उसमें पता चला कि सच में गड़बड़ थी। तो चलिए जानते हैं की क्या थे वो points जिनका हमें ध्यान रखना पड़ेगा अगर हम इस app को इस्तेमाल करना चाहते हैं तो।

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और अगर आपने इस App को डाउनलोड कर ही लिया है तो भी आपको यह पॉइंट्स जरूर देखनी चाहिए क्योंकि यह आपके काम के हैं।

  1. Aarogya Setu : Data Safety

दोस्तों सबसे पहले तो हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि हमारा डाटा जो इस App को हम दे रहे हैं उससे क्या हो रहा है ? सरकार का यह मानना है कि आपका डाटा जैसे हेल्थ, मोबाइल नंबर, आपकी Movement details, आपके contact details सब safe है। इस information को anonomyzation के process से गुमनाम कर दिया जाता है और secure server में स्टोर कर दिया जाता है।जिसका कोई गलत उपयोग नहीं होता है।

यही नहीं सरकार का यह भी दावा है कि जो भी आपकी निजी जानकारी है यह आपके फोन से 30 days और Server के Database से 45 दिन में डिलीट कर दिया जाता है तो आपकी कोई भी हिस्ट्री ट्रैकिंग या movement ट्रेकिंग नहीं होती है। सुनने में तो ये ठीक लग रहा है लेकिन क्या ऐसा सच में हो भी रहा है? इसके बारे में हम कुछ भी नहीं कह सकते क्योंकि इस App का जो कोड है वह open-source नहीं है।

सीधे शब्दों में कहें तो हमें इस बात पर यकीन करना होगा कि जैसा सरकार कह रही है

वह बिल्कुल सच है। और यह App सिर्फ और सिर्फ आपको करोना से बचाने के लिए ही बनाया गया है और इसका कोई भी और उपयोग नहीं है।

दोस्तों यह हम आपको एक बात और बताना चाहते हैं कि बाकी कुछ देशों ने जिन्होंने इस तरह की Contact Tracing Apps को बनाया है उन्होंने उसके कोर्ट को Open – Source किया था। ओपन सोर्स करने से फायदा ही है कि हम उस कोड को Personally टेस्ट कर सकते हैं। और अगर उसमें हमें कोई खामियां दिखे तो हम उन खामियों को उठा सकते हैं।singapur contact tracing app

आपको एक बात और पता नहीं होगी कि Aarogya Setu एप में जो UID(Unique Digital identity) है वह एक static नंबर है जबकि इसको एक variable number होना चाहिए था। Variable Number होने से यह और Secure हो जाता और साथ में अगर कोई हमें Trace करने की कोशिश करता तो वह पॉसिबल ही नहीं होता क्योंकि आपकी UID एक unique नंबर नहीं होता बल्कि ये बदलता रहता और कोई आपको ज़्यादा देर तक track नही कर सकता था।

2. Aarogya Setu : हमें safe रखता है ?

देखिए कोई भी App सरकारी हो या प्राइवेट आपकी 24 घंटे लोकेशन को Trace करता हो, आपके Contacts को Trace करता हो वह आपकी Privacy को Violate कर रहा है यह बात हमें माननी ही पड़ेगी। लेकिन जैसा सरकार ने बोला है कि जान है तो जहान है तो हमें ये सोचना पड़ेगा की हमारी privacy लेने के बाद भी ये app हमें सच में कोरोना Virus से सेफ रखता भी हैं या नहीं ?Location in aarogya setu

पहली बात तो ये है की किसी भी contact Tracing app को सही से काम करने के लिए उसे 40 तो 70% जनता को उस app को इस्तेमाल करना होगा। इसका मतलब है कि लगभग 70 करोड़ से ज़्यादा phones में हैं ये app चाहिए। तभी Setu ठीक से काम कर पायेगा। इसका मतलब ये है की अभी 60 करोड़ फ़ोन्स अभी बाकी हैं जिनको ये app download करना पड़ेगा।

उसके बाद भी ये app हमें बचा नहीं सकता क्योंकि ये self accessment के हिसाब से चलता है। तो अगर किसी को भी अपने आप को फिट दिखाना है तो वो पूरे सवालों के गलत जवाब देकर खुद को फिट दिखा देगा और फिर वो इंसान पूरे देश में आराम से घूम सकता है।

और यहां एक बात और है की ज़्यादातर जो corona patients हैं उनमे corona वायरस के कोई लक्षण ही नहीं हैं। तो वो लोग अपने app को बोलेंगे कि हम तो बिल्कुल ठीक हैं और फिर वो लोग आराम से घूमेंगे और कोरोना को फैलाते रहेंगे।

3. Aarogya Setu App क्या ये अस्थायी है ?

सरकार का कहना है की ईस समय सिर्फ और सिर्फ एक भयानक महामारी से निपटने के लिए बनाया गया है और ये ज़ाहिर सी बात है की अगर ये app इतनी जल्दी में बनाया गया है तो इसमें कमिया ज़रूर होंगी और इसीलिए इसके नए नए updates आ रहे हैं जिसमे पुरानी कमियों को दूर किया जा रहा है।

जैसे इस app के पहले version में ये आप आपके private folder को access कर सकता था। और अब सरकार का यह दावा है कि यह रोक दिया गया है। लेकिन इसके साथ-साथ सरकार ने यह भी दावा कर दिया है कि यह इतनी जल्दी भी नहीं जाने वाला है। यूनियन मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने यह बात कही है कि App कम से कम 1 – 2 साल रहेगा।aarogya setu 1 -2 years

बात यहीं खत्म नहीं हो जाती है नोएडा में तो सरकार ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर आपके पास Aarogya Setu App नहीं है तो आपको या तो ₹1000 जुर्माना लग जाएगा या फिर आपको 6 महीने की जेल हो सकती है।

दोस्तों इंडिया एक पहला ऐसी डेमोक्रेसी बन चुकी है जिसने Contact Tracing App को इतना ज़रूरी बनाया है। और वह भी बिना किसी Digital Privacy Framework के। पूरे देश में ऐसा कोई फ्रेमवर्क नहीं है लेकिन यह App हमें कंपलसरी बनाया जा रहा है।

4 Aarogya Setu : Centralized Vs Decentralized ?

पूरी दुनिया इस सवाल पर बंटी हुई है। सेंट्रलाइज्ड सिस्टम में आपसे Anonomyzed डाटा कलेक्ट किया जाता है रिमोट server में डाला जाता है, वहां कोई करोना positive है तो फिर इस डाटा का इस्तेमाल किया जाता है दूसरों को warn किया जाता है और पहले लोग जो उस पर्सन के कांटेक्ट में आए हैं उनको ट्रेस किया जाता है। इस सिस्टम में सरकार के पास ही सारा डाटा स्टोर रहता है और यहां पर हमारी सरकार ने भी यही सेंट्रलाइज्ड सिस्टम यूज किया है.

लेकिन Decentralized system में आपकी प्राइवेसी का ध्यान रखा जाता है। ज्यादातर डाटा आपके फोन पर ही रहता है और अगर कोई कोरोना पॉजिटिव निकलता है तो phone to phone अलर्ट जाता है बाकी सभी के मोबाइल में जो भी आपके आसपास होते हैं।

यही मॉडल इस समय गूगल और apple तैयार कर रहे हैं। और कई देश इसी मॉडल को अपना रहे हैं जैसे सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे ये देश हैं जिन्होंने centralized system को छोड़कर decentralized सिस्टम को अपनाने का फैसला लिया है। लेकिन फ्रांस जैसे कुछ देश हैं जो सेंट्रलाइज सिस्टम की तरफ जा रहे हैं।

नॉर्वे ने तो सेंट्रलाइज सिस्टम पिछले महीने ही चालू कर दिया था लेकिन Privacy Concern के चलते नॉर्वे में अब ये सिस्टम 20% लोग ही इस्तेमाल कर रहे हैं।
तो यहां सवाल ये उठता है की क्या हमारा Aarogya Setu centralized system पर ही काम करता रहेगा या हम भी Decentralized system की तरफ बढ़ेंगे जैसे Switzerland, austria, poland Canada।

दोस्तों Aarogya Setu की सेफ्टी का सच तभी सामने आया जब एक French ethical हैकर ने सरकार को सीधे सीधे बता दिया कि आपके इस App में कमी है। Hacker ने यह भी कहा कि उसने अपने एथिकल हैकिंग स्किल्स का इस्तेमाल करते हुए यह भी पता लगा लिया कि भारत में कितने लोग कोरोना पॉजिटिव हैं। यही नहीं उस हैकर ने अपनी पसंद का 100 किलोमीटर का radius सिलेक्ट किया और उस जगह को एनालाइज कर लिया कर उसमें कितने लोग corona positive हो सकते हैं। तो उसके बाद उसने जो जवाब दिया उसका screenshot अब हम आपको दे रहे हैं।

हालांकि इस हैकर के खुलासे के बाद सरकारी एजेंसियों ने खुद उनसे संपर्क किया और स्पष्टीकरण दिया कि इस कमी को दूर कर दिया गया है लेकिन सवाल यह भी उठता है कि Setu की Security और हमारा Personal Data कितना Secure है क्योंकि अगर कोई एक हैकर हमारा डाटा का पता लगा सकता है तो क्या दूसरा हैकर hack करके हमारे covid स्टेटस को पॉजिटिव से नेगेटिव बना सकता है?

यह सवाल पूछना तब भी जरूरी हो जाता है जब यह 10 करोड लोगों की प्राइवेसी का सवाल हो और मीडिया में तो इस App के privacy concern को लेकर कुछ बोला ही नहीं जा रहा हो।

अब आप ये भी कह सकते हो की privacy ज़्यादा ज़रूरी है या COVID19 से जंग? तो यहां मैं आपको बता दूँ की आपकी प्राइवेसी उतनी ही ज़रूरी है जितना आप चाहें।
Facebook, Whatsapp, Twitter, जैसी कई Apps है जो काफी सारा डाटा इस्तेमाल करती हैं तो सेतू से हम क्यों डर रहे हैं?

फर्क सिर्फ इतना है कि वहां हमसे पूछा जाता है और वहां हम अपनी सहमति देते हैं अपना डाटा शेयर करने के लिए या फिर हम यह भी कह सकते हैं कि वहां पर हम अपना डाटा खुद अपलोड करते हैं।

यहां हम आपको यह भी समझाना चाहते हैं कि अगर फेसबुक वाले खुद जबरदस्ती आपसे कहे कि आप इस App को यूज करो और रोजाना यूज करो और अपना डाटा यहां पर शेयर करो, तो हो सकता है कि हमारा नजरिया फेसबुक को लेकर भी बदल जाए।

दोस्तों सच ये भी है की सिर्फ app से ही कोरोना नहीं जाएगा। उसके लिए हमें mask चाहिए, दवाईयां चाहिए,PPE किट्स चाहिए और साथ में चाहिए जागरूकता। और सबसे ज़रूरी टेस्ट kits।

ताकि हमें पता चले की असल में कितने लोग बीमार हैं और कोरोना की ये समस्या असल मे है कितनी बड़ी। App को इस्तेमाल करना ही होगा हमें अगर बाहर ट्रेन मे या फ्लाइट मे सफर करना है तो, लेकिन सरकार को चाहिए की वो हमारी इन शंकाओं का भी समाधान निकाले क्यूंकी दिन ब दिन यह शंकाएँ बढ़ती ही जाएंगी।

तो दोस्तों आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा इस बारे में आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताइएगा और हो सके तो अपने दोस्तों को भी जागरूक लीजिए क्योंकि यहां तक हमें लगता है कि अभी हर कोई इस App को यूज कर रहा है और उसे पता होना चाहिए कि इस App के खतरे क्या-क्या है।

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